Dream.. Dreams, a Dream

Dream.. Dreams, a Dream

I couldn’t close my eyes,
pretending, you to flee..
of fervor by the dreams,
I’ve painted, ‘n I’ve seen..
There were colors..
of the mirth and the closeness
that we have shared..
the color, of contentment..
of being..
“They are not just,
sudden whims..
projected with closed eyes..”
and obsessed, as it seems..
how we ‘ve been talking for hours..
’bout the dreamlike nights..
those beauties around..
‘n the life..
We have shared, our hopes
our hankers and our sorrow,

like life was there..
and there would be no tomorrow,
and today.. when I’m here..
breathing for another life to borrow..
a little more life full whims..
for all those times and
for all those dreams..
yeah ! discolored.. defaced..
but still they simmering
dream.. dreams, a dream !

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Kya Tumhe Hai Yaad..

क्या तुम्हे है, याद
वो वक़्त जिसे हमने,
कभी साथ जिया था !
वो लफ्ज़ जो मैं कह नहीं पाया कभी..
पर जिसका इज़हार मेरी आँखों मे
समाया था…..

वो कदमो के निशा,
जो रेत पर
ना जाने थे कब तक
यूँही बिना किसी आहट,
तेरे कदमो तले सीमटते जाते थे

क्या तुम्हे है, याद
वो शब..
जब चुपके से तुम्हारे बालों को छू कर..
मैने अनकहे से लफ़ज़ो मे..
तुम्हे आपना कहा था

क्या तुम्हे है, याद
वो सब
जिसका उस वक़्त भी सिर्फ़ एहसास ही था” !

क्या तुम्हे है, याद..
वो शॅक्स
जिसकी रूह मे तुम समाई थी कहीं,
क्या तुम अब भी नहीं सुन सकती
उन
किनारो को,
जो दिल के समंदर मे,
ना जाने कब से
आपने वजूद को तरसते..
तुम्हे पुकारते रहते हैं !”

या तुम अभी भी हो..
उन बेजान पत्थरो की तरह,
सिर्फ़ अपनी पूजा को जो..
दिलों को फूलों की तरह,
खुद पर चढ़ते देखते रहते हैं !

क्या तुम्हे मेरेसचकी आहट,
अब तक सुनाई नहीं देती
क्या तुम्हे अब भी मेरी कविताओ मे,
तुमनज़र नहीं आती,
क्या तुम्हे अब भी मेरे लिखे..
उन खाली पन्नो मे,
किसी दिल की सदा सुनाई नहीं देती..
जिसमे, खुद को हार कर बस लिखा था..

हाँ ; मुझे मुहब्बत है !”

The Fear

जब कोई, खुशियाँ..
हथेलियो मे समेटे लाए..
जब हर सपनो का रंग,
सिंदूरी होता जाए..

जब साथ देता हर साया,
बढ़ता जाए

डर लगता है, की नये अंधेरो,
की तासीर क्या होगी.. ?

क्या फिर से वही, कहानी
दुहराई जाएगी..
जिसकी सीमाए, रोशनी से चलकर..
अंधेरो मे गुम हो जाएंगी

और फिर असहाय सा खड़ा मैं,
रोशनी को जाते ताकते रहता हूं !’

‘HUM TUM’

कब चाहा..
की साथ उड़ सकूँ मैं,
चाहत है..
सिर्फ़ इतनी,
कीतुम
आँखें खोलो और देखो,
किसी का सपना होतुम
किसी की कोशिशें होतुम
किसी की मंज़िल होतुम
किसी का आपना होतुम

कोई है, जो दूर से
बहूत दूर से,
खुद कोतुममे
तलाशता हुया, मैं को तरसता है !

आँखें खोलोपरी
मैंकी बस यही चाहत है..
तुम मे खो कर..
पाना
हमको !

आँखे खोलोपरी‘..
और दे दोमैंको उसकी पहचान
हम तुम

देखो ना शायद लम्हो की भी गुज़ारिश है ये

DARKEST FACE

DARKEST  FACE

Its funny, why people lie..
wearing faces, masking cries..
nodding the zeal, with closed eyes..
pretending and whitewashing
for the things, manipulating their lives..
I’ve lived all their faces..
crafting and molding me,
just for their ease..
but I’m tired now.. of being me
‘n for all those times
I couldn’t stand, what they see.

Me with the longest shadows
and with the ugliest face,
that reaches, the other side of the lace..
I still don’t know…if it’s me
or just their spoors all over the place..
I’m crawling back to the doom..
and to those dark shadows in my room..
Wearing the most darkest shade..
I’ve became the shadow…
with the ‘Darkest Face’ !!

Endless Night

Endless Night

I couldn’t sleep for long
when i woke up
you were gone..
So many things that left unsaid
crawling and stabbing,
chopping my head
‘Chuck’, can’t stand it anymore..

cripple the touch, you adore
no more soothing, nor abhor
the endless night, to endure

 

darkness, left all around..
tried to focus
but nothing, was found..
stretched my hands,
in the space
molded stones
but there wasn’t any face,
that endless night,
swallowed it all
triggered in me, the endless fall.

 

Stunned, deprived
and alone
gloomy, tortured
and a bit frown
wide awake, in the middle of night..
cherishing the moments
of a hopeless fight..
walls around, squeezing me tight
I’m counting the seconds,
of an endless night.