Excuses

My mom called me today..
scared of the dream,
she had last night !
i’m her same little kid again..
‘n she had lost me somewhere
she was choking..
while telling me, this
terrible excuse to call
during my ‘busy’ office hours

Couldn’t tell her
but really wanted to cry out loud
“mom, you don’t have to..
find a reason to call,
‘n i’ll always be your
same little kid, wanting you
to make me calm,
every time i fall..”

instead i’m writing this..
as an excuse of being big ‘n tall

i love u, mom !
‘n really, i’m lost..
trying hard to be the same,
little kid once again..
with no excuses at all..!!

 

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डर

कल ही तो तुम,
फिर मेरे सपने मे आई थी
कुछ वादे, कुछ वफ़ा..
और ढेर सारे सपने लाई थी,
उन सपनो को आसमा पर बिछा कर हमने
उन्हे तारों से सजाया था..!
उन ‘वादों’ को, उस पुरानी इमारत मे..
कितनी बार दोहराया था !

एक घर बनाया था..
“सिर्फ एक रेत का घर नही है”
जाने कब तक दुहराया था !
पर रेत का ही घर था.. शायद,
छूते ही टूट गया..
टूट कर एक एक टीला हो गया !

और भी कितने टीलों की तरह,
जो वहीं हुमारे टीले के पास थे !
हमारे ही एहससों की तरह..
दफ़्न उनमे भी,
न जाने कितने एहसास थे !

क्यों कर ऐसा होता है,
क्यों दिलों मे, एक रेत का टीला होता है,
क्यों टूटते हैं सपने अक्सर..
और क्यों एक डर हर सपने के साथ होता है !!