The Fear

जब कोई, खुशियाँ..
हथेलियो मे समेटे लाए..
जब हर सपनो का रंग,
सिंदूरी होता जाए..

जब साथ देता हर साया,
बढ़ता जाए

डर लगता है, की नये अंधेरो,
की तासीर क्या होगी.. ?

क्या फिर से वही, कहानी
दुहराई जाएगी..
जिसकी सीमाए, रोशनी से चलकर..
अंधेरो मे गुम हो जाएंगी

और फिर असहाय सा खड़ा मैं,
रोशनी को जाते ताकते रहता हूं !’

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