Kya Tumhe Hai Yaad..

क्या तुम्हे है, याद
वो वक़्त जिसे हमने,
कभी साथ जिया था !
वो लफ्ज़ जो मैं कह नहीं पाया कभी..
पर जिसका इज़हार मेरी आँखों मे
समाया था…..

वो कदमो के निशा,
जो रेत पर
ना जाने थे कब तक
यूँही बिना किसी आहट,
तेरे कदमो तले सीमटते जाते थे

क्या तुम्हे है, याद
वो शब..
जब चुपके से तुम्हारे बालों को छू कर..
मैने अनकहे से लफ़ज़ो मे..
तुम्हे आपना कहा था

क्या तुम्हे है, याद
वो सब
जिसका उस वक़्त भी सिर्फ़ एहसास ही था” !

क्या तुम्हे है, याद..
वो शॅक्स
जिसकी रूह मे तुम समाई थी कहीं,
क्या तुम अब भी नहीं सुन सकती
उन
किनारो को,
जो दिल के समंदर मे,
ना जाने कब से
आपने वजूद को तरसते..
तुम्हे पुकारते रहते हैं !”

या तुम अभी भी हो..
उन बेजान पत्थरो की तरह,
सिर्फ़ अपनी पूजा को जो..
दिलों को फूलों की तरह,
खुद पर चढ़ते देखते रहते हैं !

क्या तुम्हे मेरेसचकी आहट,
अब तक सुनाई नहीं देती
क्या तुम्हे अब भी मेरी कविताओ मे,
तुमनज़र नहीं आती,
क्या तुम्हे अब भी मेरे लिखे..
उन खाली पन्नो मे,
किसी दिल की सदा सुनाई नहीं देती..
जिसमे, खुद को हार कर बस लिखा था..

हाँ ; मुझे मुहब्बत है !”

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