डर

कल ही तो तुम,
फिर मेरे सपने मे आई थी
कुछ वादे, कुछ वफ़ा..
और ढेर सारे सपने लाई थी,
उन सपनो को आसमा पर बिछा कर हमने
उन्हे तारों से सजाया था..!
उन ‘वादों’ को, उस पुरानी इमारत मे..
कितनी बार दोहराया था !

एक घर बनाया था..
“सिर्फ एक रेत का घर नही है”
जाने कब तक दुहराया था !
पर रेत का ही घर था.. शायद,
छूते ही टूट गया..
टूट कर एक एक टीला हो गया !

और भी कितने टीलों की तरह,
जो वहीं हुमारे टीले के पास थे !
हमारे ही एहससों की तरह..
दफ़्न उनमे भी,
न जाने कितने एहसास थे !

क्यों कर ऐसा होता है,
क्यों दिलों मे, एक रेत का टीला होता है,
क्यों टूटते हैं सपने अक्सर..
और क्यों एक डर हर सपने के साथ होता है !!

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The Other half..!

The Other half..

You, the other person,
or the second me ?
I’m afraid, it scares..
for all the time
since you’ve shown
what I was lacking,
what I’ve found.
‘n now what could be lost..
The beauty ‘n the life,
the way things had turned out
‘n the way my dreams..
got the ground..
Is it me or it’s ‘you’?
who has colored it,
all of sudden,
it looks complete to me..
I pamper, I pray..
to make the ease,
just for another day..
could it be the way..
Is that the way,
we were meant to be ?
just to know..
the other half of you,
‘n the other half of me..!!

To wait or it’s a waste?

To wait or it’s a waste?

Sometimes, I know..
things are out of reach,
sometimes, I show..
how hard I’ve tried,
sometimes, I throw..
even things I’ve got,
just to get the dream..
‘n for the rest of the time,
I wait.. for the miracle !
though I know..
me gonna take away ‘nothing’
the risk, always seems..
as if it’s larger than life !

Sometimes, I wonder..
how far I can go
sometimes, I’ve tried..
to spread my wings,
‘n make the fly..
sometimes, I dunk..
into the deep driven ocean,
‘n for rest of the time
I stay still.. waiting
the ocean to go dry..

“The time you enjoy wasting..
is not wasted time”

‘n as if I’ve the whole life,
just to waste ‘n to wait..
for the dream, I’ve waited for
Some where waiting.. for me !!

He, who died..

He, who died..

Its just, he was alone
for all those nights..
a hate.. for lives,
that he has, lived..
howling for his dreams
confined to his fears,
suppressing his tears..
he used to choke,
while trying to speak..
as if its ripping his throat,
but still he carved..
for another reason,
to cut it apart..
don’t know why,
he didn’t want to die..
from dusk till dawn,
heard him pray..
just for another day..
and on the day,
when he woke up..
and found the haze
‘n the fog inside,
The curtains wet..
windows open..
doors ajar..
has it rained.. ?
perhaps he cried..
last night… he, who died..!


Shrek – hallelujah by sachin verma

Tum Pukar lo.. Tumahara Intezaar hai !

एक इंतज़ार है,
इन आँखों को, जो जानेकहाँ तक..
उन अंधेरी वीरान हो चुकी गलियो मे,
तुम्हे खोजती हैं,
जिनसे कभी हम गुज़रे थे !

एक इंतज़ार है,
मेरे एहसासों को, जो जाने कब से..
दिल के अंधेरो मे,
तन्हा, गुमसुम है !

एक इंतजार है,
मेरे दिल को, जो कब से..
तुमसे कुछ लफ़्ज़ों, को तरसता है !

एक इंतज़ार है,
और भी कितने इंतज़ारों की तरह..
कि तुम पुकारोगे..
मेरे इंतेज़ारों कि मिश्री मुझे दोगे,
और तब, उन अंधेरी वीरान गलियों मे..
वो लफ्ज़, मेरे एहसासो को पाकर..
एक नये संगीत को गुनगुनायेंगे !!

एक इंतज़ार है,
कि कभी तो मेरे इंतजारो की सीमाए..
बढ़कर तुम्हे मेरे छू लेंगी,
और तुम्हे मेरे इंतेज़ारों का एहसास होगा,
तब तुम चुपके से बढ़कर..
मेरा हाथ थाम लोगी,
मेरे बिखरे सपनो को समेट कर,
उनमे रंग भर दोगी !!

एक इंतज़ार है,
की जब तेरे दिल की धड़कन,
मेरे दिल की तरह ही धड़केंगी..

एक इंतज़ार है,
उस खामोशी का,
जिसके बाद कोई भी तुंफान,
तुम्हे मुझसे जुदा न कर पाएगा,

एक इंतज़ार है,
की तुम पुकरोगी,
“तुम पुकार लो..
तुम्हारा इंतज़ार है !!”

Hemant from Khamoshi – “तुम पुकार लो.. तुम्हारा इंतज़ार है !!” by sachin verma

मेरा पागल मन !

एक उजली सुबह,
ख्यालों के बादल..
मेरे दिल के आँगन में,
कुछ ओर नमी लेकर उतर आये..!
मेरे तन्हा घर मे दस्तक दी
कौन है ! कौन आया होगा ? ”
किसी ने भूलकर दरवाज़ा खटखटाया होगा !”

एक भीनी सी खुश्बू,
एक शीतल सा एहसास,
और धुँधलाधुँधला सा सबकुछ..

अचानक हीबसंतमेरे घर गाया,
क्यारी केफूल‘,
जो जाने कब से खिलाना भूल सा गये थे,
फिर अंगड़ाई सी ले रहे हैं !
उनके पत्तों पर उतार आई नमी….
बूँद बनकर, नए एहससों की रोशनी, बिखेरने
लगती है !

साँसों मे घुली मिठास
ओर नया नया सा सबकुछ
इतने
प्यारे फूल, “ये मैने कब बोए थे !”
ये दीवारें, ” इन पर ये रंग तो ना था
ये आईना, ” ये तो झूठ नहीं बोलता, पर ये मैं तो नहीं हूँ!”
और मेरी तन्हाई
वो कहाँ है
ये क्या हो रहा है, मैं हूँ पर.. मैं,
दिल तो कुछ ओर कह रहा है ?”

ख़यालो..
ये किसकासाथहै तेरे साथ !
जिसने मेरे ही मन को मुझसे ही..
अजनबी कर दिया है !!”
और ये रोशनी कैसी,
मेरे मन मे तो कोई सूरज नहीं है
ये आईना इसपर किसने जादू किया है
इन फूलों को तो देखो,
जैसे सारा गुलशन ही समेट लिया है !
बोलो ना, किसकासाथहै, तेरे साथ

कोई आने वाला है..
रेहने को तेरे दिल में,
उसका ही जादू है तेरे मन में,
ये आईना झूठ नहीं हक़ीकत है,
तुझे भी तो उसी की हसरत है !
वो ही तो है , तेरी रोशनी
और वोही तो तेरा सूरज है,

अब वो रही है, तो..
उसपरीको आपने मन के,
मुरझाए फूल दिखाएगा,
चलमनतू अब,
हर पल एक नया फूल
खिलाएगा…!

“‘परी“,  परी है‘ !! तो मेरे पास क्यों आएगी,
हाँ चलो हसरत है, तो क्यापरीमिल जाइएगी..
औरमन‘, तू तो पागल है,
इन ख़यालों की बातों मे गया
आरे पागल चाँद क्या हथेली मे समाएगा..
और इतना बड़ा सूरज,
क्या तुम्हे मिल जाएगा.. !
पागल!”  चल फिर तन्हाई ढूंढते हैं,
और इन फूलों को उखाड़ फेकते हैं !

केह दो इन ख़यालों से,
बसंतले कर बाहर जाये..
और केह दो हमे इस तरह तो ना सताये,
हाँ प्यारे हैं तो क्या..
झूठे ख्वाब तो ना दिखाए !
क्योंकि सपनो के टूटने पर,
ये सारे आईने टूट जायेंगे..
टूट कर चुभेंगे, तुझे और मुझे..
और ये ख़याल दूर खड़े मुस्कुराएगे !
फिर किसी का तो क्या
खुद का चेहरा नहीं देख पाएगा,
फिर जाने तू, कब संम्भल पाएगा

मनबोझिल कदमो से चलता..
आपने फूलों.. “

दरवाजे पर फिर से दस्तक,
एक मीठा सा तेज़ उजाला..
एक प्यारा सा संगीत, हँसता
बादल,
जाना पहचाना सा सूरज..
और पूरा गुलशन..

मेरा पागल मन !

परी गयी ! परी गयी !”
सचमेरीपरी गयी….

Dream.. Dreams, a Dream

Dream.. Dreams, a Dream

I couldn’t close my eyes,
pretending, you to flee..
of fervor by the dreams,
I’ve painted, ‘n I’ve seen..
There were colors..
of the mirth and the closeness
that we have shared..
the color, of contentment..
of being..
“They are not just,
sudden whims..
projected with closed eyes..”
and obsessed, as it seems..
how we ‘ve been talking for hours..
’bout the dreamlike nights..
those beauties around..
‘n the life..
We have shared, our hopes
our hankers and our sorrow,

like life was there..
and there would be no tomorrow,
and today.. when I’m here..
breathing for another life to borrow..
a little more life full whims..
for all those times and
for all those dreams..
yeah ! discolored.. defaced..
but still they simmering
dream.. dreams, a dream !