My Mermaid

My Mermaid

The morning.. I’ve seen,
the sunlight.. spreading
wings in its dew..
sparkled and flew..
I thought, it was ‘you’..
like wide open eyes
wondering,
where are ‘you’ ?
Chanted and mesmerized..
with the morning on the beach,
a mermaid out of the water..
lying there was.. you ?
I closed my eyes..
to make the wish, wondering..
if it’s gonna be true..

still i could see.. the smile
of the eternal bliss,
even with my closed eyes..
the innocence of eternity,
blessed with the warmth
close, as those sea drops..
with million of soft sparks !
hurry.. lemme make the wish
wondering, if it could be you ?
umm… I wish for the morning,
this sparkles.. and the dew,
and a heart.. to tell you,
the skies or the sun,
the moon or billion of stars..
nothing sparks me,
the way you do..
you’re my guiding star
and yeah, all I wish is ‘you’…

you are my morning,
my mermaid,
I love you…!

Dana glover – shrek by sachin verma

मेरा पागल मन !

एक उजली सुबह,
ख्यालों के बादल..
मेरे दिल के आँगन में,
कुछ ओर नमी लेकर उतर आये..!
मेरे तन्हा घर मे दस्तक दी
कौन है ! कौन आया होगा ? ”
किसी ने भूलकर दरवाज़ा खटखटाया होगा !”

एक भीनी सी खुश्बू,
एक शीतल सा एहसास,
और धुँधलाधुँधला सा सबकुछ..

अचानक हीबसंतमेरे घर गाया,
क्यारी केफूल‘,
जो जाने कब से खिलाना भूल सा गये थे,
फिर अंगड़ाई सी ले रहे हैं !
उनके पत्तों पर उतार आई नमी….
बूँद बनकर, नए एहससों की रोशनी, बिखेरने
लगती है !

साँसों मे घुली मिठास
ओर नया नया सा सबकुछ
इतने
प्यारे फूल, “ये मैने कब बोए थे !”
ये दीवारें, ” इन पर ये रंग तो ना था
ये आईना, ” ये तो झूठ नहीं बोलता, पर ये मैं तो नहीं हूँ!”
और मेरी तन्हाई
वो कहाँ है
ये क्या हो रहा है, मैं हूँ पर.. मैं,
दिल तो कुछ ओर कह रहा है ?”

ख़यालो..
ये किसकासाथहै तेरे साथ !
जिसने मेरे ही मन को मुझसे ही..
अजनबी कर दिया है !!”
और ये रोशनी कैसी,
मेरे मन मे तो कोई सूरज नहीं है
ये आईना इसपर किसने जादू किया है
इन फूलों को तो देखो,
जैसे सारा गुलशन ही समेट लिया है !
बोलो ना, किसकासाथहै, तेरे साथ

कोई आने वाला है..
रेहने को तेरे दिल में,
उसका ही जादू है तेरे मन में,
ये आईना झूठ नहीं हक़ीकत है,
तुझे भी तो उसी की हसरत है !
वो ही तो है , तेरी रोशनी
और वोही तो तेरा सूरज है,

अब वो रही है, तो..
उसपरीको आपने मन के,
मुरझाए फूल दिखाएगा,
चलमनतू अब,
हर पल एक नया फूल
खिलाएगा…!

“‘परी“,  परी है‘ !! तो मेरे पास क्यों आएगी,
हाँ चलो हसरत है, तो क्यापरीमिल जाइएगी..
औरमन‘, तू तो पागल है,
इन ख़यालों की बातों मे गया
आरे पागल चाँद क्या हथेली मे समाएगा..
और इतना बड़ा सूरज,
क्या तुम्हे मिल जाएगा.. !
पागल!”  चल फिर तन्हाई ढूंढते हैं,
और इन फूलों को उखाड़ फेकते हैं !

केह दो इन ख़यालों से,
बसंतले कर बाहर जाये..
और केह दो हमे इस तरह तो ना सताये,
हाँ प्यारे हैं तो क्या..
झूठे ख्वाब तो ना दिखाए !
क्योंकि सपनो के टूटने पर,
ये सारे आईने टूट जायेंगे..
टूट कर चुभेंगे, तुझे और मुझे..
और ये ख़याल दूर खड़े मुस्कुराएगे !
फिर किसी का तो क्या
खुद का चेहरा नहीं देख पाएगा,
फिर जाने तू, कब संम्भल पाएगा

मनबोझिल कदमो से चलता..
आपने फूलों.. “

दरवाजे पर फिर से दस्तक,
एक मीठा सा तेज़ उजाला..
एक प्यारा सा संगीत, हँसता
बादल,
जाना पहचाना सा सूरज..
और पूरा गुलशन..

मेरा पागल मन !

परी गयी ! परी गयी !”
सचमेरीपरी गयी….