Kya Tumhe Hai Yaad..

क्या तुम्हे है, याद
वो वक़्त जिसे हमने,
कभी साथ जिया था !
वो लफ्ज़ जो मैं कह नहीं पाया कभी..
पर जिसका इज़हार मेरी आँखों मे
समाया था…..

वो कदमो के निशा,
जो रेत पर
ना जाने थे कब तक
यूँही बिना किसी आहट,
तेरे कदमो तले सीमटते जाते थे

क्या तुम्हे है, याद
वो शब..
जब चुपके से तुम्हारे बालों को छू कर..
मैने अनकहे से लफ़ज़ो मे..
तुम्हे आपना कहा था

क्या तुम्हे है, याद
वो सब
जिसका उस वक़्त भी सिर्फ़ एहसास ही था” !

क्या तुम्हे है, याद..
वो शॅक्स
जिसकी रूह मे तुम समाई थी कहीं,
क्या तुम अब भी नहीं सुन सकती
उन
किनारो को,
जो दिल के समंदर मे,
ना जाने कब से
आपने वजूद को तरसते..
तुम्हे पुकारते रहते हैं !”

या तुम अभी भी हो..
उन बेजान पत्थरो की तरह,
सिर्फ़ अपनी पूजा को जो..
दिलों को फूलों की तरह,
खुद पर चढ़ते देखते रहते हैं !

क्या तुम्हे मेरेसचकी आहट,
अब तक सुनाई नहीं देती
क्या तुम्हे अब भी मेरी कविताओ मे,
तुमनज़र नहीं आती,
क्या तुम्हे अब भी मेरे लिखे..
उन खाली पन्नो मे,
किसी दिल की सदा सुनाई नहीं देती..
जिसमे, खुद को हार कर बस लिखा था..

हाँ ; मुझे मुहब्बत है !”

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Endless Night

Endless Night

I couldn’t sleep for long
when i woke up
you were gone..
So many things that left unsaid
crawling and stabbing,
chopping my head
‘Chuck’, can’t stand it anymore..

cripple the touch, you adore
no more soothing, nor abhor
the endless night, to endure

 

darkness, left all around..
tried to focus
but nothing, was found..
stretched my hands,
in the space
molded stones
but there wasn’t any face,
that endless night,
swallowed it all
triggered in me, the endless fall.

 

Stunned, deprived
and alone
gloomy, tortured
and a bit frown
wide awake, in the middle of night..
cherishing the moments
of a hopeless fight..
walls around, squeezing me tight
I’m counting the seconds,
of an endless night.